UPI पर फिर लग सकता है MDR शुल्क: 2020 में हटाई गई फीस की वापसी की तैयारी?

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6 साल बाद UPI ट्रांजैक्शन पर फिर लग सकता है शुल्क

देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने Payment and Settlement Systems Act में संशोधन का प्रस्ताव संसद में पेश किया है, जिससे भविष्य में Unified Payments Interface (UPI) लेनदेन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने का कानूनी रास्ता खुल सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी किसी शुल्क को अंतिम मंजूरी नहीं दी है।


क्या होता है MDR?

Merchant Discount Rate (MDR) वह शुल्क होता है जो व्यापारी (Merchant) प्रत्येक डिजिटल भुगतान पर बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को देता है। यह शुल्क पेमेंट प्रोसेसिंग, बैंकिंग नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत को पूरा करने में मदद करता है।

वर्तमान में:

  • UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य है।
  • 2020 से सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर MDR समाप्त कर दिया था।
  • इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था।

सरकार बदलाव क्यों चाहती है?

UPI का उपयोग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और डिजिटल भुगतान कंपनियों, बैंकों तथा फिनटेक संस्थानों का कहना है कि बिना किसी राजस्व मॉडल के बढ़ते नेटवर्क, साइबर सुरक्षा और तकनीकी निवेश को लंबे समय तक बनाए रखना कठिन होता जा रहा है।

इसी कारण सरकार अब ऐसा कानूनी ढांचा तैयार कर रही है जिससे जरूरत पड़ने पर चुनिंदा UPI लेनदेन पर MDR लागू किया जा सके।


किन ट्रांजैक्शन पर लग सकता है शुल्क?

अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार सरकार कुछ विकल्पों पर विचार कर रही है:

  • ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लागू किया जा सकता है।
  • केवल बड़े व्यापारियों (Large Merchants) पर शुल्क लगाया जा सकता है।
  • जिन कारोबारियों का वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से अधिक है, उन्हें दायरे में लाया जा सकता है।
  • संभावित MDR दर 0.3% से 0.5% के बीच हो सकती है।

क्या ग्राहकों को भी देना होगा चार्ज?

फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है कि आम उपभोक्ताओं से UPI भुगतान पर शुल्क लिया जाएगा।

यदि भविष्य में MDR लागू होता है, तो यह शुल्क मुख्य रूप से व्यापारियों (Merchants) द्वारा भुगतान किया जाएगा। हालांकि, कुछ व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं या सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं।


उद्योग पर संभावित प्रभाव

यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो इसके कई प्रभाव हो सकते हैं:

  • बैंकों और फिनटेक कंपनियों को नया राजस्व स्रोत मिलेगा।
  • डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ सकता है।
  • बड़े व्यापारियों की लेनदेन लागत बढ़ सकती है।
  • छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अलग व्यवस्था बनाई जा सकती है।

अभी क्या स्थिति है?

यह केवल कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। सरकार ने अभी MDR लागू करने या उसकी दर तय करने का अंतिम निर्णय नहीं लिया है। शुल्क लागू होगा या नहीं, किस पर होगा और कितना होगा—इन सभी बातों पर आगे नीति स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।


निष्कर्ष

यदि प्रस्तावित संशोधन आगे लागू होते हैं, तो भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में यह सबसे बड़े नीतिगत बदलावों में से एक होगा। इसका उद्देश्य UPI नेटवर्क को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना है, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर प्रभाव को सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।

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