Bharat की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में गरीबी के स्तर में बड़ी गिरावट का उल्लेख किया गया है। World Bank के आंकड़ों के अनुसार, देश में Extreme Poverty Rate वर्ष 2011-12 के 27.1% से घटकर 2023-24 में 2.6% रह गई।
यह आंकड़ा आर्थिक और सामाजिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, गरीबी को समझने के लिए केवल एक प्रतिशत देखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे इस्तेमाल की गई गरीबी रेखा, आय या उपभोग का स्तर, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर तथा रोजगार और जीवन स्तर जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी है। The World Bank+1
27.1% से 2.6% तक कैसे पहुंची गरीबी दर?
World Bank के आंकड़ों में 2011-12 और 2023-24 के बीच Extreme Poverty Rate में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
2011-12 में लगभग 27.1% आबादी निर्धारित अत्यधिक गरीबी के स्तर के नीचे थी। 2023-24 तक यह आंकड़ा घटकर 2.6% बताया गया।
इसका अर्थ है कि संबंधित गरीबी मापदंड के अनुसार आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा अब उस निर्धारित अत्यधिक गरीबी सीमा से ऊपर है।
रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए आंकड़े और गरीबी की परिभाषा महत्वपूर्ण हैं। अलग-अलग गरीबी रेखाओं के आधार पर गरीबी का अनुमान अलग हो सकता है। इसलिए Extreme Poverty और सामान्य गरीबी को एक ही अर्थ में इस्तेमाल करना सही नहीं होगा।
Extreme Poverty का क्या मतलब है?
Extreme Poverty का अर्थ ऐसी आर्थिक स्थिति से है जहां किसी व्यक्ति या परिवार के पास अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।
इन जरूरतों में भोजन, कपड़े, आवास और अन्य आवश्यक खर्च शामिल हो सकते हैं।
World Bank अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए एक निर्धारित गरीबी रेखा का इस्तेमाल करता है। समय-समय पर इस गरीबी रेखा को अपडेट किया जाता है ताकि अलग-अलग देशों में जीवनयापन की लागत और क्रय शक्ति को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
इसलिए किसी रिपोर्ट में गरीबी दर का उल्लेख करते समय यह देखना जरूरी है कि कौन-सी गरीबी रेखा और किस वर्ष के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
गरीबी में गिरावट के पीछे कौन से कारक हो सकते हैं?
गरीबी में कमी किसी एक योजना या एक आर्थिक फैसले का परिणाम नहीं होती। आमतौर पर इसके पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारक काम करते हैं।
1. रोजगार और आय के अवसर
रोजगार के अवसर बढ़ने से परिवारों की आय में सुधार हो सकता है। कृषि, विनिर्माण, निर्माण, सेवाओं और छोटे व्यवसायों में रोजगार की उपलब्धता गरीबी कम करने में भूमिका निभा सकती है।
2. वित्तीय समावेशन
बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच, डिजिटल पेमेंट और वित्तीय योजनाओं ने लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में मदद की है।
बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन की उपलब्धता से सरकारी लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
3. सरकारी कल्याणकारी योजनाएं
खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं गरीब परिवारों के खर्च का बोझ कम करने में योगदान दे सकती हैं।
4. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा
सड़क, बिजली, इंटरनेट, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है।
इससे छोटे व्यवसायों, किसानों और स्थानीय उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं।
49.6 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का दावा
इस खबर के साथ लगभग 49.6 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने का आंकड़ा भी चर्चा में है। इस आंकड़े को प्रकाशित करते समय उसके मूल स्रोत और गणना के तरीके की पुष्टि जरूरी है।
गरीबी में कमी का अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि किस गरीबी रेखा को आधार बनाया गया है, किस अवधि की आबादी की तुलना की गई है और किस डेटा का इस्तेमाल हुआ है।
इसलिए इस संख्या को World Bank के मूल दस्तावेज से मिलाए बिना एक निश्चित आधिकारिक आंकड़े के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।
MSME सेक्टर गरीबी कम करने में कैसे मदद कर सकता है?
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSMEs रोजगार सृजन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
छोटे उद्योग स्थानीय स्तर पर उत्पादन, व्यापार और सेवाओं को बढ़ावा देते हैं। ये ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।
MSME सेक्टर के विकास से निम्नलिखित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आ सकता है:
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ना।
- महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार को बढ़ावा मिलना।
- छोटे शहरों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार।
- स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना।
- सप्लाई चेन में छोटे कारोबारों की भागीदारी बढ़ना।
हालांकि, MSMEs के सामने फंडिंग, तकनीक, बाजार तक पहुंच और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
क्या गरीबी में कमी का मतलब आर्थिक असमानता खत्म होना है?
नहीं। Extreme Poverty Rate में गिरावट का अर्थ यह नहीं है कि देश में आर्थिक असमानता या गरीबी से जुड़ी सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं।
किसी परिवार का अत्यधिक गरीबी की सीमा से ऊपर आ जाना और उसका आर्थिक रूप से सुरक्षित होना दो अलग बातें हैं।
आय में स्थिरता, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार की गुणवत्ता और महंगाई जैसे पहलू भी जीवन स्तर को प्रभावित करते हैं।
इसलिए गरीबी के आंकड़ों का मूल्यांकन व्यापक आर्थिक और सामाजिक संदर्भ में करना जरूरी है।
निष्कर्ष
World Bank के आंकड़ों में 2011-12 से 2023-24 के बीच Extreme Poverty Rate में बड़ी गिरावट दर्ज होना Bharat के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
हालांकि, गरीबी के आंकड़ों को समझते समय इस्तेमाल की गई गरीबी रेखा और डेटा की अवधि पर ध्यान देना जरूरी है। आने वाले वर्षों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और MSME सेक्टर का विस्तार इस प्रगति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
FAQs
Q1. World Bank के अनुसार Bharat में Extreme Poverty Rate कितनी हुई?
दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में Extreme Poverty Rate 2.6% रही।
Q2. 2011-12 में Extreme Poverty Rate कितनी थी?
रिपोर्ट में यह आंकड़ा 27.1% बताया गया है।
Q3. Extreme Poverty का क्या अर्थ है?
यह ऐसी स्थिति है जहां व्यक्ति की आर्थिक क्षमता बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं होती, निर्धारित अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के अनुसार।
Q4. क्या Extreme Poverty कम होने का मतलब गरीबी पूरी तरह खत्म होना है?
नहीं। यह एक विशेष गरीबी सीमा के नीचे रहने वाली आबादी का अनुपात बताता है। आर्थिक असमानता और अन्य गरीबी संबंधी चुनौतियां अलग मुद्दे हैं।
Internal Links: MSME Sector and Employment, Government Schemes for Small Businesses, Rural Entrepreneurship in Bharat.
External Links: World Bank Poverty Data · World Bank Poverty Report
