भारत में Food Wastage की चुनौती: फल-सब्जियों का नुकसान, Cold Storage और मजबूत Supply Chain की बढ़ती जरूरत

Food wastage in India, cold storage infrastructure and post harvest losses in fruits and vegetables

भारत दुनिया के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन खेती से बाजार तक पहुंचने के दौरान बड़ी मात्रा में कृषि उपज खराब हो जाती है। विशेष रूप से फल और सब्जियां जल्दी खराब होने वाली commodities हैं। इनके लिए सही तापमान, वैज्ञानिक भंडारण, बेहतर पैकेजिंग और समय पर परिवहन जरूरी होता है।India Food Wastage

जब किसानों की उपज को पर्याप्त storage और processing facilities नहीं मिलतीं, तो उसका एक हिस्सा बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो सकता है। इसका असर केवल किसानों की कमाई पर नहीं, बल्कि व्यापारियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, खुदरा बाजार और उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ता है।

ऐसे में भारत के लिए Cold Storage और Integrated Cold Chain Infrastructure को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण आर्थिक जरूरत बन गया है।

भारत में Post-Harvest Losses कितने बड़े हैं?

Food Processing Industries Ministry द्वारा commissioned NABCONS की 2022 की study के अनुसार, भारत में कृषि उपज के post-harvest losses अलग-अलग फसलों में अलग-अलग स्तर पर हैं।

सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार:

कृषि उत्पादअनुमानित Post-Harvest Loss
अनाज (Cereals)3.89%–5.92%
दालें (Pulses)5.65%–6.74%
तिलहन (Oilseeds)2.87%–7.51%
फल (Fruits)6.02%–15.05%
सब्जियां (Vegetables)4.87%–11.61%
मछली (Marine Fisheries)8.76%

ये आंकड़े 2020–22 के अध्ययन पर आधारित हैं और 54 कृषि commodities तथा 15 agro-climatic zones के अध्ययन से प्राप्त हुए हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि perishables यानी जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए बेहतर storage और logistics infrastructure की जरूरत है।

Cold Storage की कमी से कैसे बढ़ता है नुकसान?

फल और सब्जियों की shelf life सीमित होती है। यदि harvesting के तुरंत बाद उन्हें सही तापमान पर नहीं रखा जाता, तो उनकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य तेजी से घट सकता है।

एक प्रभावी cold chain में कई चरण शामिल होते हैं:

1. Farm-level collection

किसानों से उपज इकट्ठा करने के बाद उसकी grading और sorting की जाती है। खराब या क्षतिग्रस्त उत्पादों को अलग करना जरूरी होता है।

2. Pre-cooling और Cold Storage

कई फल और सब्जियों को harvesting के बाद जल्दी ठंडा करना जरूरी होता है। इसके बाद उन्हें नियंत्रित तापमान और नमी वाली storage facilities में रखा जाता है।

3. Refrigerated Transportation

Cold storage से बाजार या processing unit तक उत्पाद पहुंचाने के लिए refrigerated vehicles की जरूरत हो सकती है। सामान्य ट्रकों में लंबी दूरी तय करने के दौरान तापमान नियंत्रण नहीं होने से नुकसान बढ़ सकता है।

4. Processing और Packaging

जिन उत्पादों को तुरंत बेचना संभव नहीं है, उन्हें processing के जरिए juice, pulp, frozen food, dehydrated products या अन्य value-added products में बदला जा सकता है।

₹1.22 लाख करोड़ Food Wastage का दावा: आंकड़ों को समझना क्यों जरूरी है?

Food wastage को लेकर विभिन्न reports में बड़े आर्थिक नुकसान का अनुमान सामने आता रहा है। लेकिन किसी एक वर्ष में भारत का कुल food wastage ₹1.22 लाख करोड़ होने का दावा करते समय उसकी methodology, reference year और शामिल commodities को देखना जरूरी है।

भारत सरकार द्वारा प्रकाशित ICAR-CIPHET और NABCONS studies अलग-अलग कृषि उत्पादों के post-harvest losses का प्रतिशत देती हैं। इन आंकड़ों को सीधे किसी एक monetary loss estimate के बराबर नहीं माना जा सकता।

इसलिए ₹1.22 लाख करोड़ को बिना स्पष्ट और स्वतंत्र रूप से सत्यापित source के सरकारी आधिकारिक आंकड़ा बताना उचित नहीं होगा।

Food Inflation पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

जब किसी विशेष कृषि उत्पाद की supply कम होती है और demand बनी रहती है, तो उसकी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, food inflation केवल storage की कमी से तय नहीं होती। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • मौसम और मानसून में बदलाव
  • फसल उत्पादन में कमी
  • परिवहन और ईंधन लागत
  • मंडियों और supply chains में व्यवधान
  • आयात और निर्यात नीतियां
  • खाद्य प्रसंस्करण और वितरण की क्षमता

Reuters की 6 November 2026 की economists’ poll report में October के लिए food inflation 8.20% तक पहुंचने का अनुमान जताया गया था। यह economists का forecast था, अंतिम आधिकारिक inflation reading नहीं।

इससे यह समझना जरूरी है कि कृषि supply chain की समस्याएं food prices को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन किसी एक inflation forecast को केवल food wastage का परिणाम नहीं माना जा सकता।

Food Processing MSMEs के लिए बड़ा अवसर

भारत में Cold Chain और Food Processing sector के विकास से MSMEs के लिए कई व्यावसायिक अवसर बन सकते हैं।

1. Mini Cold Storage Units

कृषि उत्पादक क्षेत्रों के पास छोटे और मध्यम cold storage units स्थापित किए जा सकते हैं। इससे किसानों को अपनी उपज को तुरंत कम कीमत पर बेचने की मजबूरी कम हो सकती है।

2. Refrigerated Logistics

Refrigerated vans, reefer trucks और temperature-controlled transport services छोटे logistics businesses के लिए एक संभावित अवसर हैं।

3. Food Processing Units

फल और सब्जियों से pulp, juice, frozen products, dehydrated vegetables, pickles और ready-to-cook products बनाए जा सकते हैं।

4. Packaging और Sorting Solutions

Food-grade packaging, grading, sorting और quality testing से जुड़े MSME businesses कृषि supply chain को अधिक कुशल बना सकते हैं।

5. Rural Aggregation Centres

गांवों और कृषि मंडियों के आसपास collection और aggregation centres बनाकर किसानों की उपज को processors और बड़े buyers से जोड़ा जा सकता है।

सरकार की योजनाएं और Infrastructure Support

भारत सरकार post-harvest losses को कम करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से food processing और cold chain infrastructure को बढ़ावा दे रही है।

Ministry of Food Processing Industries की Pradhan Mantri Kisan Sampada Yojana के तहत Integrated Cold Chain and Value Addition Infrastructure जैसी योजनाओं के माध्यम से पात्र परियोजनाओं को सहायता दी जाती है।

इसके अतिरिक्त, Agriculture Infrastructure Fund और अन्य संबंधित योजनाओं के जरिए eligible infrastructure projects को वित्तीय सहायता और loan-linked support उपलब्ध हो सकता है। प्रत्येक योजना की eligibility और current guidelines अलग-अलग जांचना जरूरी है।

निष्कर्ष: खेत से बाजार तक मजबूत Supply Chain जरूरी

भारत में खाद्य उत्पादन बढ़ाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उत्पादन के बाद उपज को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। यदि फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचने से पहले खराब हो जाते हैं, तो किसानों की मेहनत और निवेश दोनों प्रभावित होते हैं।

Cold Storage, refrigerated transportation, food processing और बेहतर packaging infrastructure में निवेश से post-harvest losses कम करने में मदद मिल सकती है।

MSMEs के लिए यह केवल एक infrastructure challenge नहीं, बल्कि food processing, logistics, storage और technology solutions में नए business opportunities का क्षेत्र भी है।

FAQs

Q1. भारत में Post-Harvest Losses क्या हैं?
फसल की कटाई के बाद storage, handling, transportation और marketing के दौरान होने वाले नुकसान को post-harvest losses कहा जाता है।

Q2. किन कृषि उत्पादों में नुकसान अधिक होता है?
NABCONS 2022 study के अनुसार फल और सब्जियों में post-harvest losses कई अन्य फसलों की तुलना में अधिक हैं।

Q3. Cold Chain क्या होती है?
Cold chain तापमान नियंत्रित storage और transportation की ऐसी व्यवस्था है, जो जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती है।

Q4. Food Processing MSMEs को क्या अवसर मिल सकते हैं?
Cold storage, refrigerated transport, packaging, sorting, food processing और value-added products जैसे क्षेत्रों में अवसर बन सकते हैं।

Q5. क्या सरकार Cold Storage के लिए सहायता देती है?
हां, पात्र परियोजनाओं के लिए Ministry of Food Processing Industries और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत अलग-अलग प्रकार की सहायता उपलब्ध हो सकती है।

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